25,26,27 नवंबर 2025, श्री कृष्ण भगवान मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव।

और जानें

गौशाला को दिया गया दान इनकम टैक्स की धारा 80G के अंदर का छूट प्राप्त है।

अभी दान करें

हमारी गौशाला की नवीनतम गतिविधियों और कार्यक्रमों से अपडेट रहें।

और जानें

25,26,27 नवंबर 2025, श्री कृष्ण भगवान मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव।

और जानें

गौशाला को दिया गया दान इनकम टैक्स की धारा 80G के अंदर का छूट प्राप्त है।

अभी दान करें

हमारी गौशाला की नवीनतम गतिविधियों और कार्यक्रमों से अपडेट रहें।

और जानें
Gaushala ViewGaushala ViewGaushala ViewGaushala ViewGaushala ViewGaushala ViewGaushala ViewGaushala View

बिलावास की पावन भूमि

श्री बिलावास गौशाला सेवा समिति में आपका स्वागत है - जहाँ करुणा, सेवा और भक्ति का संगम होता है। हमारी यात्रा में शामिल हों और इस पवित्र मिशन का हिस्सा बनें।

हमारी जड़ें

बिलावास नगरे एक संक्षिप्त इतिहास

बिला की ढाणी से बिलावास - अब बिलावास विला सिटी से जानी जाती है। भारत वर्ष की पावन धरा जहाँ एक तरफ अपने सुरम्य प्राकृतिक सौन्दर्य व देव नगरी के लिए जग विख्यात है। इस पुण्य धरा पर अवतरित माँ आईजी विक्रम संवत 1529 में बिलावास अपने नन्दी के साथ शाम को बिलोजी पंवार के घर पधारे और बिलोजी पंवार व उनकी धर्मपत्नी ने माताजी की बहुत निष्काम भाव से सेवा की और जब सुबह हुई तो बिलोजी व उनकी धर्मपत्नी ने माताजी को दण्डवत प्रणाम किया और बिलोजी की धर्मपत्नी نے यहां ही रहने का आग्रह किया तब माताजी ने उनकी सेवा से अत्यन्त प्रसन्न होकर बिलोजी को आशिर्वाद दिया की बिला थारी ढाणी वेदे सवायं।

मां आईजी का आशिर्वाद फलीभुत हुआ उनके वरदान से राजस्थान के पाली जिला के सोजत तहसील में सुनहरे गौरवशाली इतिहास का साक्षी है आज बिला की ढाणी बिलावास के नाम से जाना जाता है जिसमें गाँव के मध्य अत्यन्त प्राचिन कृष्ण भगवान का मन्दिर, शान्तिनाथ भगवान का मन्दिर, आईमाता का मन्दिर, सोनाणा खेतलाजी व शिव मन्दिर, सत्यनारायण भगवान व रामदेवजी मन्दिर, शीतला माता मन्दिर, राजकीय व सेकन्ड्री हाईस्कूल व बहुत ही सुन्दर गौशाला है जिसमें 1200 गौ-माता का निवास है और गौशाला के बिचो बिच संगमरमर पत्थर का कृष्ण भगवान के मन्दिर का निर्माण कार्य चालु है। आज बिलावास में लगभग 3500 घरों की हर जाती के लोगों की बस्ती है। यहाँ का प्रत्येक परिवार गौशाला से जुड़ा हुआ है।

और पढ़ें
Bilawas

द्वारा आयोजित: श्री बिलावास गौशाला सेवा समिति

श्री कृष्ण भगवान मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव

भावभरा हार्दिक आमंत्रण

शुभ दिनांक

25, 26 व 27 नवम्बर 2025

प्राण प्रतिष्ठा

27-11-2025, गुरुवार

प्रातः शुभवेला में

शुभ स्थल

श्री गौशाला प्रांगण

बिलावास, जिला - पाली (राजस्थान)

निमंत्रक: श्री बिलावास गौशाला सेवा समिति

मुख्य कार्यालय (H.O.)

बिलावास, वाया - सोजत सिटी, जिला पाली - 306 104. (राज.)

मो.: 94135 33853, 74258 26701

शाखा कार्यालय (B.O.)

KALPTARU AVENUE, 2nd Floor, 16th Cross, R.T. Street Cross, BVK Iyengar Road Cross, BANGALORE - 560 053.

CONTACT: 93412 23836, 98861 82388, 98440 20468, 96021 85184, 94499 83645

Holy Cow

गौ माता की महत्ता

“यथा सर्व मिद त्याप्तं जगत् स्थावर जङ्गमम् ।

तां धेनु शिरसा वन्दे भूत भवस्य मातारमं ॥

गाय विश्व की माता है। गावो विश्वस्य मातरः।”

गाय के पंच गव्य – दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र शाररिक एवं धार्मिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है। मनुष्य के अस्वस्थ होने पर गाय का दूध पिलाया जाता है। जो तुरन्त शक्ति प्रदान करता है। मनुष्य जब यात्रा के लिये जाना होता है तो उस समय गाय का दही लेना मांगलिक माना गया है। गाय के अंगो में सम्पूर्ण देवताओ का निवास बताया गया है। दूध पिलाती गाय का दर्शन बहुत ही शुभ माना गया है। जहाँ गाय बैठती है वहाँ की भूमि और गाय के चरणों की धूल भी पवित्र होती है। निष्काम भाव से गाय की सेवा करने से मोक्ष प्राप्त होता है। तथा अतः करण निर्मल होता है। भगवान् श्री कृष्ण ने गायों को चराया था जिससे उनका नाम गौपाल पड़ा। गाय से अर्थ धर्म काम और मोक्ष इन चारों की सिद्धि प्राप्त होती है। शास्त्रार्थ गौमाता ही सबसे बड़ा धन है। जिस घर में गौ माता की पूजा सेवा होती है। वहाँ पर कभी भी सुख समृद्धी की कमी नही होती। धार्मिक आस्था के अनुसार गौ पूजा से मन वांछित फल की प्राप्ती होती है। आज भी भारतीय संस्कृति में गाय को गौ माता माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार ब्राह्मजी ने जब सृष्टि की रचना की थी तब सबसे पहले गाय को ही पृथ्वी पर भेजा गया था।

मात्र गाय में ही माँ शब्द का उच्चारण होता है। इसलिये माना जाता है की माँ शब्द की उत्पति भी गौवंश से हुई। सायंकाल गौमाता के घर लौटने का संध्या का समय – गौधुलिक वेला अत्यन्त ही शुभ एवं पवित्र है। गाया को मूत्र गौ ओषाधि है। गौमुत्र का पवन ग्रथों में अथर्व वेद चरक संहीता, रजातिपटु बाण भट्ट, अमृत सागर भाव सागर सश्रुतु संहिता में सुन्दर वर्णन किया गया है। आज बहुत संस्थाएँ गौशाला बनाकार पुनीत कार्य कर रही है, जो एक प्रशंसनीय विषय है। गाय हमारी माता है। एवं गौ रक्षा हमारा परम कर्तव्य है। मान्यता है कि जिस घर में गाय रहती है। उस घर के सभी वास्तु दोष दूर हो जाते है। गौ दान को महादान बताया गया । इसमें गौदान का महत्व बहुत ज्यादा है। गाय का सिर्फ धार्मिक ही नहीं बाल्कि ज्योतिष महत्व भी है। ज्योतिष के अनुसार 09 ग्रहो की शांति के लिये गाय की पूजा विशेष रूप से लाभदायी है। गाय की सेवा पूजा आराधना आदि से लक्ष्मी प्रसन्न एवं प्राप्त होती है।

गायों की सेवा करो रोज नवाओं शीश।

खुश होकर देंगी तुम्हे, वे लाखो आशीष।

गौमाता करता सदा, भव सागर में पार।

इनकी तुम सेवा करो, जीवन देगी तार॥

॥ जय गौमाता ॥

संख्याओं में हमारा प्रभाव

करुणा और सामूहिक कार्रवाई की शक्ति के माध्यम से हम जो कुछ भी हासिल करते हैं, उस पर हमें गर्व है।

0+

आश्रित गायें

0+

समर्पित स्वयंसेवक

0+

खुश दाता

हमारी उपलब्धियाँ और सम्मान

हमें जिला स्तरीय गोपालन समिति, पाली द्वारा "जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ गौशाला" (द्वितीय श्रेणी) के रूप में सम्मानित किया गया है।

जिला स्तरीय सर्वश्रेष्ठ गौशाला प्रमाण पत्र

प्रशस्ति-पत्र

श्री बिलावास गौशाला सेवा समिति को जिला स्तरीय गोपालन समिति पाली द्वारा मूल्यांकन के आधार पर वर्ष 2024-25 की जिला स्तरीय द्वितीय श्रेणी की सर्वश्रेष्ठ गौशाला के रूप में चयन किये जाने पर गौशाला को पुरस्कार स्वरुप रुपये 5000/-, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया जाता है।

(एल.एन.मंत्री)

जिला कलक्टर, पाली

दिनांक : 26.01.2025

हमारी सेवाएँ और गतिविधियाँ

हमारी गौशाला सिर्फ एक आश्रय नहीं है; यह देखभाल, पोषण और सेवा का एक जीवंत केंद्र है, जहाँ हर गाय को सम्मान और प्रेम के साथ पाला जाता है।

दैनिक चारा और पोषण

हम सुनिश्चित करते हैं कि हमारी सभी गायों को पौष्टिक, संतुलित भोजन और स्वच्छ, आरामदायक वातावरण मिले।

चिकित्सा देखभाल

हमारी गौशाला में एक समर्पित चिकित्सा इकाई है जहाँ नियमित स्वास्थ्य जांच और बीमार गायों का उपचार किया जाता है।

बचाव और पुनर्वास

हम सक्रिय रूप से परित्यक्त और संकटग्रस्त गायों को बचाते हैं, उन्हें एक सुरक्षित आश्रय और सम्मान का जीवन प्रदान करते हैं।

गैलरी: हमारी गौशाला के कुछ पल

हमारी गौशाला के शांत और करुणामय वातावरण की एक झलक देखें।

Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Gaushala View
Krishna with Cow

इस नेक काम में हमारा साथ दें

आपका उदार योगदान हमें इन पवित्र आत्माओं की देखभाल जारी रखने में सक्षम बनाता है। प्रत्येक दान एक अंतर बनाता है।

स्कैन करके दान करें

UPI QR Code

बैंक ट्रांसफर

SHREE BILAWAS GOSHALA SEWA SAMITI
A/C: 89480200002203
IFSC: BARB0VJCMBA
BRANCH: (CITY MARKET BRANCH), BANGALORE
BANK OF BARODA

दान करने के बाद, कृपया अपना विवरण हमें बताएं ताकि हम आपको रसीद भेज सकें।

दान रिकॉर्ड करें

गौशाला को दिया गया दान इनकम टैक्स की धारा 80G के अंदर का छूट प्राप्त है।

ट्रस्ट कार्यकारिणी

श्री गजराज पगारिया

श्री गजराज पगारिया

चेयरमेन

रायपुर, छत्तिसगढ
संघवी श्री इन्दरचन्द बोहरा

संघवी श्री इन्दरचन्द बोहरा

अध्यक्ष

शिवाजीनगर, बेंगलोर
संघवी श्री नरेन्द्र आच्छा

संघवी श्री नरेन्द्र आच्छा

सचिव

किल्लारी रोड, बेंगलोर
श्री अमराराम चोयल

श्री अमराराम चोयल

कोषाध्यक्ष

चिकपेट, बेंगलोर
1008 घनश्याम दासजी महाराज

1008 घनश्याम दासजी महाराज

मार्गदर्शक

आनन्द आश्रम बिलावास

एक स्वयंसेवक बनें और एक अंतर लाएं

क्या आप हमारे मिशन के प्रति जुनूनी हैं? हम हमेशा ऐसे समर्पित व्यक्तियों की तलाश में रहते हैं जो हमारी टीम में शामिल हो सकें और इस नेक काम में योगदान दे सकें।

हमसे संपर्क करें